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मनोज सिंह

उपन्यासकार, स्तंभकार, कवि, कहानीकार...

लेखक मनोज सिंह का जन्म 1 सितंबर, 1964 को आगरा (उत्तर प्रदेश) में और बचपन महाराष्ट्र व मध्यप्रदेश में बीता। पिता श्री हरिमोहन सिंह एवं माता (स्वर्गीय) कृष्णा सिंह की तृतीय संतान व एकलौते पुत्र की हायर सेकेंडरी परीक्षा, मध्यप्रदेश में मैरिट में स्थान था। इंजीनियरिंग की शिक्षा रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज भोपाल से। भारतीय दूरसंचार सेवा 1986 बैच के अधिकारी के रूप में मुंबई, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा व हिमाचल प्रदेश में भिन्न-भिन्न पदों पर कार्य किया। दूरसंचार विभाग में विभिन्न अवार्ड व पुरस्कार से सम्मानित लेखक को सर्वश्रेष्ठ दूरसंचार जिला के प्रमुख होने का गौरव भी प्राप्त है। एमबीए की शिक्षा इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय, दिल्ली से उत्तीर्ण की।

लेखक की प्रथम रचना 'चंद्रिकोत्सव' (खंड काव्य) का द्वितीय संस्करण प्रकाशित। 'चंद्रिकोत्सव' अर्थात चांदनी रात का कौमुदी महोत्सव। प्रियतमा का प्रियतम से प्रीत का संपूर्ण कालचक्र, उसकी विभिन्न अवस्थाओं का वर्णन। शिमला यूनिवर्सिटी में इस पुस्तक पर एमफिल। दूसरी रचना 'बंधन' एक काल्पनिक उपन्यास जिसमें मानसिक रोगी (स्किजोफिरनियां) से पीड़ित व्यक्ति के परिवार की व्यथा एवं उनके रिश्तों के मानवीय, पारिवारिक, सामाजिक व वैज्ञानिक दृष्टिकोण को विस्तार से सरल शब्दों में दिखाया गया है। मानसिक रोगी के परिवार की दर्दभरी कहानी में वास्तविकता का पुट देने के उद्देश्य से लेखक ने कई संबंधित अस्पतालों का भ्रमण भी किया था। इस उपन्यास पर भी शोध का कार्य जारी है। उपन्यास का अनुवाद कई भाषाओं में किया जा रहा है। इस उपन्यास को वेबसाइट पर सीरियल के रूप में भी प्रसारित किया गया जो कि अत्यधिक लोकप्रिय रहा। तीसरी रचना 'व्यक्तित्व का प्रभाव' लेखों का संकलन। लेखक की कहानी व लघुकथाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं। प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं के लिए पुस्तक समीक्षा। विभिन्न संस्थानों एवं कालेज में समय-समय पर व्याख्यान, साथ ही टेलीविजन व रेडियो पर चर्चा-परिचर्चा में लेखक को आमंत्रित किया जाता है। साप्ताहिक कॉलम का नियमित लेखन। लेखक ने कई पत्रिकाओं का सफल संपादन भी किया है।


लेखक की नयी रचना में उपन्यास 'कशमकश' का लोकार्पण श्री नामवर सिंह के द्वारा किया गया था जो चर्चा में है। इसमें नारी के विकास की कहानी, समाजशास्त्र की दृष्टि से। 'कशमकश' नारी के मन-मस्तिष्क का आंतरिक संघर्ष, आदर्श व यथार्थ का अंतहीन अंतर्द्वंद्व। एक ही परिवार के तीन पीढ़ियों की महिलाओं का चित्रण। समाज के हर क्षेत्र, वर्ग, उम्र का प्रतिनिधित्व करती नारी, अपने सशक्त विचारों के साथ। लेखक की आने वाली रचनाओं में उपन्यास 'जी सर', जिसमें सरकारी कार्यालय के जटिल तंत्र में सिसक कर दम तोड़ती ज़िंदगियों का मार्मिक वर्णन, जो सत्य के साथ सरल व सहज होगा।



 

 

 

 

 

 

 

 



 

 

   
 
   
   
   
   
   
   
   
   
   
   
   
   
   
                                       
 

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